इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत चीन के कई नेताओं से मुलाक़ता की थी. ज़ाहिर है इस दौरान म सूद अज़हर पर भी निश् चित तौर पर बातचीत हुई होगी. हालांकि चीन ने संयुक्त राष्ट्र सु रक्षा परिषद को अपना फैसला तो बता दिया, लेकिन पाकिस् तान को कम से कम नुक़सान हो, इसके लिए चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इसकी कोई समयसीमा नहीं बताई और अपनी पार्टी लाइन को दोहराते हुए कहा कि जल्द से जल्द इस मसले का उचित समाधान निकाला जाना चाहिए. चीन की परेशानी को और बढ़ाते हुए पेरिस स्थित फाइ नेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफ़एटीएफ़) ने पिछले एक साल में पाकिस्तान पर नकेल कसते हुए उसे अपनी 'ग्रे लिस्ट' में डाल दिया और उसे जून तक 'काली सूची' में डालने की भी चेतावनी दी. अगर ऐसा होता है तो पाकिस्तान के लिए इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं. एफ़एटीएफ़ ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वो अपनी धरती पर वि भिन्न चरमपंथी संगठनों की आर्थिक फंडिग रोकने में नाकाम रहा है. चीन फिलहाल एफ़एटीएफ़ का उपाध्यक् ष है और अक्तूबर में अध्यक्ष बनने वा ला है. चीन ने अपने फ़ैसले में इस बात का भी ध्यान र...