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स्टेट बैंक अकाउंट के रेपो रेट से लिंक होने के मायने

इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत चीन के कई नेताओं से मुलाक़ता की थी. ज़ाहिर है इस दौरान मसूद अज़हर पर भी निश्चित तौर पर बातचीत हुई होगी.
हालांकि चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को अपना फैसला तो बता दिया, लेकिन पाकिस्तान को कम से कम नुक़सान हो, इसके लिए चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इसकी कोई समयसीमा नहीं बताई और अपनी पार्टी लाइन को दोहराते हुए कहा कि जल्द से जल्द इस मसले का उचित समाधान निकाला जाना चाहिए.
चीन की परेशानी को और बढ़ाते हुए पेरिस स्थित फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफ़एटीएफ़) ने पिछले एक साल में पाकिस्तान पर नकेल कसते हुए उसे अपनी 'ग्रे लिस्ट' में डाल दिया और उसे जून तक 'काली सूची' में डालने की भी चेतावनी दी. अगर ऐसा होता है तो पाकिस्तान के लिए इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं.
एफ़एटीएफ़ ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वो अपनी धरती पर विभिन्न चरमपंथी संगठनों की आर्थिक फंडिग रोकने में नाकाम रहा है.
चीन फिलहाल एफ़एटीएफ़ का उपाध्यक्ष है और अक्तूबर में अध्यक्ष बनने वाला है. चीन ने अपने फ़ैसले में इस बात का भी ध्यान रखा होगा.
इसके अलावा भारत की हाल में की गई राजनयिक कोशिशें, ख़ासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आतंकवाद-विरोधी अभियान को भी सराहने की ज़रूरत है, जिसके तहत मोदी चीन समेत सभी महाशक्तियों से सक्रिय द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बातचीत के दौरान इस मुद्दे को पुरज़ोर तरीक़े से उठाते रहे हैं.
चीन की घोषणा की टाइमिंग से ये भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि सत्ताधारी पार्टी बीजेपी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तरफ़ से मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने का फ़ायदा भारत में हो रहे आम चुनाव में ले सकती है. वो इसे चीन और पाकिस्तान के ख़िलाफ़ अपनी विदेश नीति की बड़ी जीत के तौर पर पेश कर सकती है.
लेकिन सरसरी तौर पर इस पूरे मामले की हक़ीक़त पर निगाह डाली जाए तो पता चल जाएगा कि मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया जाना प्रतीकात्मक महत्व से ज़्यादा कुछ भी नहीं है.
मुंबई में 26/11 के चरमपंथी हमले के बाद ओबामा प्रशासन ने 2012 में हाफ़िज़ सईद के बारे में पुख़्ता सबूत जुटाने वाले को (जिससे उन्हें सज़ा दी जा सके) एक करोड़ डॉलर का इनाम देने का वादा किया था.
पाकिस्तान में इतनी ग़रीबी के बावजूद कोई भी इस इनाम के लालच में नहीं आया. ज़्यादा से ज़्यादा पाकिस्तान की सरकार ने कई बार हाफ़िज़ सईद को 'नज़रबंद' कर दिया था और अदालतों ने उन्हें सभी मामलों में बरी कर दिया.
हाफ़िज़ सईद ना सिर्फ़ पाकिस्तान में खुले आम घूमते रहे हैं, बल्कि उन्होंने वहां एक राजनीतिक पार्टी भी बना ली. इस पार्टी ने पिछले साल जुलाई में हुए चुनावों में नेशनल असेंबली के लिए 80 उम्मीदवारों और प्रांतीय विधान सभाओं के लिए 185 उम्मीदवारों को उतारा था.
मसूद अज़हर की क़िस्मत भी इससे कुछ अलग नहीं होगी.
देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ने पहली मई से बचत खाते पर मिलने वाले ब्याज़ और कम अवधि के कर्ज़ के रेट को रिजर्व बैंक के रेपो रेट से लिंक कर दिया है.
यानी जब-जब रिज़र्व बैंक रेपो रेट में बदलाव करेगा तब-तब बचत खातों (सेविंग अकाउंट) और कम अवधि के कर्ज़ (शॉर्ट टर्म लोन) की दरों में उसी समय बदलाव हो जाएगा.
इसका मतलब ये हुआ कि अब रिज़र्व बैंक की पॉलिसी को बैंकिंग सिस्टम में लागू करना आसान हो जाएगा.
बैंक ने मार्च में ही इसकी घोषणा की थी कि वो 1 मई 2019 से बैंक 1 लाख रुपये से ज़्यादा बैलेंस वाले बचत खातों और अल्पावधि कर्ज़ को रिजर्व बैंक के रेपो रेट से लिंक कर देगा.
चलिए जानते हैं स्टेट बैंक की इस नई नीति के क्या हैं मायने.

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